लिख दो

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दिल उदास है बोहोत कोई पैगाम ही लिख दो,
तुम अपना नाम ना लिखो, गुमनाम ही लिख दो.
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मेरी किस्मत में ग़म-ए-तन्हाई है लेकिन,
तमाम उम्र ना लिखो मगर एक शाम ही लिख दो.
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ज़रूरी नहीं की मिल जाए सुकून हर किसी को,
सर-ए-बज़्म ना आओ मगर बेनाम ही लिख दो.
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ये जानता हूँ  की उम्रभर तन्हा मुझको रहना है,
मगर पल दो पल घडी दो घडी ही मेरे नाम लिख दो.
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चलो हम मान लेते है की सज़ा के मुस्ताहिक़ ठहरे हम,
कोई इनाम ना लिखो कोई इलज़ाम ही लिख दो.
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– अज्ञात

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गुज़ारिश

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सिर्फ इतना ही कहा है – प्यार है तुमसे,
जज़बातों की कोई नुमाईश नहीं की.
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प्यार के बदले सिर्फ प्यार माँगा है,
रिश्ते की तो कोई गुज़ारिश नहीं की.
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चाहो तो भुला देना हमें दिल से,
सदा याद रखने की सिफ़ारिश नहीं की.
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ख़ामोशी से तूफ़ान सह लेते है जो,
उन बादलों ने इज़हार की बारिश नहीं की.
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तुम्हे ही माना है रहनुमा अपना,
और किसी चीज़ की ख्वाहिश नहीं की.
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– अज्ञात

मुझे तुम से बिछड़ना है

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एक दिन इस हादसे से भी दिल को गुज़ारना है,
मुझे तुम से कहीं ना कहीं तो बिछड़ना है.
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वस्ल की रातों में जो महके थे मेरे दिल में,
शब्-ए-हिज्र्रां में उन गुलाबों को बिखरना है.
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रखे है आँखों में मोती ये संभाल के,
दामन-ए-मिज़गां से इन्हें टूट के गिरना है,
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मेरी चश्म-ए-तर यूंही रहने दे,
मेरी हस्ती को इस दुनिया में उतरना है.
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वोह मसीहाई के हर हुनर से वाकिफ है,
कहता है अश्कों ही से ज़ख्म-ए-दिल को भरना है.heart
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अभी से हाथ क्यों दिल पे रख लिया?
तावील है बोहोत, तुम्हे सफ़र तय जो करना है.
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– अज्ञात