मुझे तुम से बिछड़ना है


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एक दिन इस हादसे से भी दिल को गुज़ारना है,
मुझे तुम से कहीं ना कहीं तो बिछड़ना है.
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वस्ल की रातों में जो महके थे मेरे दिल में,
शब्-ए-हिज्र्रां में उन गुलाबों को बिखरना है.
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रखे है आँखों में मोती ये संभाल के,
दामन-ए-मिज़गां से इन्हें टूट के गिरना है,
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मेरी चश्म-ए-तर यूंही रहने दे,
मेरी हस्ती को इस दुनिया में उतरना है.
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वोह मसीहाई के हर हुनर से वाकिफ है,
कहता है अश्कों ही से ज़ख्म-ए-दिल को भरना है.heart
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अभी से हाथ क्यों दिल पे रख लिया?
तावील है बोहोत, तुम्हे सफ़र तय जो करना है.
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– अज्ञात

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