तुझसे मोहब्बत नहीं हमें


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ऐसा नहीं के तुझसे मोहब्बत नहीं हमें,
पर ग़म रोज़ रोज़ सहने की आदत नहीं हमें.
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हर बार तेरे सामने सर झुका लिया,
और फिर भी देख तुझसे शिकायत नहीं हमें.
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तू ऐतबार कर के तुझे चाहते है हम,
तेरे सिवा किसी की भी चाहत नहीं हमें.
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हम जानते है तू भी है तन्हा हमारे बिन,
औरों से पूछने की ज़रुरत नहीं हमें.
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कैसे रहेंगे बिन तेरे? अब बात मान ले,
तेरे बगैर जीने की आदत नहीं हमें.
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– अज्ञात

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