माफ़ी


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तुम रूठ जाया करो
इस तरह
की जैसे
ज़िंदगी की ख्वाहिश करनेवालों से
ज़िंदगी रूठ जाती है.
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मुझे सताया करो
इस तरह
की जैसे
मौत की तमन्नाई को ज़िंदगी सताती है.
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साथ छोड़ जाया करो
इस तरह
की जैसे
खुशबु फूलों को छोड़ जाती है.
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मगर…
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जब मेरे ज़ब्त के बंधन टूट जाएँ तो
मान जाया करो
इस तरह
की जैसे
गुनाहगार बंदे के गिडगिडाने पर
खुदा मान जाता है…!!!
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– क्रिश्ना

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