सहारे नहीं है…


.
.
नदी है, भंवर है, किनारे नहीं है,
अलम है, सितम है, सहारे नहीं है.
.
.
कई रिश्ते-नाते है दुनिया में लेकिन,
हमारे नहीं है, तुम्हारे नहीं है.
.
.
वो दिन ज़िंदगी भर गुज़ारे है हमने,
जो दिन तुमने अब तक गुज़ारे नहीं है.
.
.
न छोड़ी कभी हमने खुद्दारी अपनी,
कभी हाथ हमने पसारे नहीं है.
.
.
मुक़द्दर को रखते है ठोकर में अपनी,
मुक़द्दर के राजा है, मारे नहीं है!
.
.
ये उलझी लटों से पता चल रहा है,
कई दिन से गेसू सँवारे नहीं है.
.
.
तेरे ग़म से कम दर्द है खंजरों का,
यूँ ही दिल में इन को उतारे नहीं है.
.
.
जहां भर के सब लोग है हमको प्यारे,
मगर हम किसी के भी प्यारे नहीं है.
.
.
ये है खेल कैसा कि हम जिस में अब तक,
कोई दाव जीते या हारे नहीं है!
.
.
– हर्ष ब्रह्मभट्ट

Advertisements

3 thoughts on “सहारे नहीं है…

  1. जहां भर के सब लोग है हमको प्यारे..
    સાચી વાત. એમાં ને એમાં જ તો…

  2. @Heena Parekh : वो दिन ज़िंदगी भर गुज़ारे है हमने,
    जो दिन तुमने अब तक गुज़ारे नहीं है.
    એટલે બધા માટે પ્રેમ છે મને. સંબંધો જ છેલ્લે સુધી જોડે હોય છે બીજું કંઈ કરતા કંઈ જ નહીં.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s