अहसास हो गया वो…

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आँखों में ख्वाब भर के कुछ ऐसे सो गया वो,
दुनिया तो दुनिया, ख़ुद से बेगाना हो गया वो.
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वो आसमाँ को छूने निकला था अपने घर से,
वापस न आया अब तक, तारों में खो गया वो.
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अपने तसव्वुरों में करता हूँ याद उसको,
साँसों में आता-जाता अहसास हो गया वो.
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सीने में मेरे उसकी यादों का एक शज़र है,
साँसों की धरती पर यूँ अपने को बो गया वो.
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जब पास मेरे आया, ऐसा मुझे रुलाया,
चहरे पे जितने ग़म थे, हर ग़म को धो गया वो.
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जाने की उसने ठानी, फिर बात किसकी मानी?
की मिन्नतें कि मत जा, फिर भी तो लो, गया वो!
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– हर्ष ब्रह्मभट्ट