क्या असर करेंगे?

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एक जुस्तजू में ख़ुद को हम दरबदर करेंगे,
याने तलाश उनकी हम उम्र भर करेंगे.
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राहें मिले, न मंजिल, अब वो सफ़र करेंगे,
अपना पता चला तो अपनी खबर करेंगे.
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ले लेंगे जान मेरी उनकी जुदाई के पल,
इस से ज़ियादा मुझ पे ये क्या असर करेंगे?
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महेमाँ समझ के दिल ने उनको पनाह दी थी,
सोचा नहीं था उनके ग़म दिल में घर करेंगे.
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दिल की लगी तू दिल की राहों से दूर हट जा,
फुरसत कभी मिली तो तुझ पे नज़र करेंगे.
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वो ज़ुल्म ढाया ग़म ने, लब सी लिये है हमने,
दिल की ज़ुबां से उनका शिकवा मगर करेंगे.
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खूने-जिगर से हमने उन पर ग़ज़ल लिखी है,
अशआर इस ग़ज़ल के उन पर असर करेंगे?
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– हर्ष ब्रह्मभट्ट

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