हर साँस एक ग़ज़ल है


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मिलते मिलाते रहिये, यूं आते जाते रहिये,
रिश्ता है दिल से दिल का, रिश्ता निभाते रहिये.
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ख़ुद को ही ख़ुद से कब तक छुपाते रहिये?
क्यों आईने को अपना दुश्मन बनाते रहिये?
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ये दिन शबाब के है, याने हिजाब के है,
दुनिया तो दुनिया, ख़ुद को ख़ुद से छुपाते रहिये.
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ख्वाबों के जिस नगर में, सोई है उनकी यादें,
ख्वाबों के उस नगर की नींदे उड़ाते रहिये.
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पर्दा क्यों डाले रखिये हर वक़्त आईने पर?
एक बेजबान पर क्यों यूं ज़ुल्म ढाते रहिये?
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साज़े-हयात तुमसे हर लम्हा कह रहा है,
हर साँस एक ग़ज़ल है, सुनते सुनाते रहिये.
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मेरी ग़ज़ल के सारे अशआर है तुम्हारे,
मैं चाहता हूँ इनको बस गुनगुनाते रहिये.
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यूं अश्क मत बहाओ, ख़ुद पर सितम न ढाओ,
पलकों में रखके आँसू हँसते हँसाते रहिये.
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आसन है ये दुनिया, मुश्किल है इसमे रहना,
दुनिया में रहना है तो बनते बनाते रहिये.
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सीधी सी बात तुमको, सीधे से कह रहा हूँ,
आँखों की राह लेकर दिल में समाते रहिये.
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क्या चाँद, क्या सितारे, बुझने लगे है सारे,
पाना है गर उजाला जलते जलाते रहिये.
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आँखों में ख्वाब ले कर, एक इन्कलाब ले कर,
दुनिया की रहगुज़र पर चलते चलाते रहिये.
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दौरे खिज़ा हो फिर भी गुलशन में गुल खिलेंगे,
वीरानियाँ हो फिर भी सजते सजाते रहिये.
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बुनियाद इससे ज़ियादा, दुनिया की है भला क्या?
दो बात पर है दुनिया, बस खोते पाते रहिये.
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– हर्ष ब्रह्मभट्ट

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2 thoughts on “हर साँस एक ग़ज़ल है

  1. सीधी सी बात तुमको, सीधे से कह रहा हूँ,
    आँखों की राह लेकर दिल में समाते रहिये.

    kya bat…!

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