ज़हन में आता क्या है?


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अपनी तस्वीर को आंखोसे लगाता क्या है?
एक नज़र मुझ पर भी डाल तेरा जाता क्या है?
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मेरी रुस्वाई में वोह भी है बराबर के शरीक,
मेरे किस्से मेरे यारों को सुनाता क्या है?
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पास रहकर भी ना पहेचान सका तू मुझको,
दूर से देखकर अब हाथ हिलाता क्या है?
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उम्रभर अपने गरेबान से उलझनेवाले,
तू मुझे मेरे ही साए से डराता क्या है?
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मैं तेरा कुछ भी नहीं हूँ मगर इतना तो बता,
देखकर मुझको तेरे ज़हन में आता क्या है?
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– क्रिश्ना

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