સ્વરચિત


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ज़िंदगी की सोचता हूँ ना ज़माने की सोचता हूँ,
मैं तो बस उसे अपना बनाने की सोचता हूँ.
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उसके रूठ जाने के अंदाज़ की कसम,
वो रूठ जाये तो मनाने की सोचता हूँ.
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उसने ना की वफ़ा तो कोई गिला नहीं,
मैं उससे वफ़ा निभाने की सोचता हूँ.
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वो मुझे रुलाये तो कोई ग़म नहीं,
मैं रो कर भी उसे हँसाने की सोचता हूँ.
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वो ढाये लाख ज़ुल्म ही सही मुझपे -और मैं,
अपने इरादे मुकम्मिल करने की सोचता हूँ.
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नकाब उठाया उसने क़त्ल करने के इरादे से,
नज़र ना लगे मेरी – उसे कम देखने की सोचता हूँ.
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एहसान अपने गिनवाते रहे वो मुझे उंगलियों पर,
उनके बेहिसाब सितम पर चुप रहने की सोचता हूँ.
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छोड़ गए मुझे वो अकेला इस अन्जानी भीड़ में,
मैं उनसे उनकी तन्हाईयों में मिलने की सोचता हूँ.
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क्रिश्ना

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कुछ तो है – तू बदल गया है.
वो तेरी आँखों के ख्वाब सारे,
वो बातें सारी, हिसाब सारे,
सवाल सारे, जवाब सारे,
वो खुशियाँ सारी, अज़ाब सारे,
नशा था जो वो उतर गया है.
कुछ तो है – तू बदल गया है.
जो तेरे मिलने की आरज़ू थी,
जो तुझको पाने की जुस्तजू थी,
हुई जो चाहत अभी शुरू थी,
जो तेरी आँखों में रोशनी थी,
जो तेरी बातों की रंगीनी थी,
जो तेरी साँसों की ताज़गी थी,
जो तेरे लहजे मैं चाशनी थी -
वो सारा मीठा पिघल गया है.
कुछ तो है – तू बदल गया है.
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- क्रिश्ना

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हर तरफ दुनिया के सारे रंजोगम हँसते रहे,
बेतहाशा खिल खिलाकर उनपे हम हँसते रहे.
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हम इधर थे मुंतजीर और थी मेरी मंजिल उधर,
बीच में लंबे सफ़र के पेचोखम हँसते रहे.
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हम ज़मानेभर का पि के ज़हर पत्थर हो गए,
पर जिन्हें हमने तराशा वो सनम हँसते रहे.
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मैं दोरंगेपन पे दुनिया के हँसा था कल यहाँ,
सोचकर क्या आप लेकिन मोहतरम हँसते रहे?
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हम ज़मीन के चाँद तारों में रहे मशरुफ्फ़ यूं,
आसमान के चाँद तारें बेरहम हँसते रहे.
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हमने जैसे ही कलम की नोक कागज़ पर रखी,
हम इधर रोते रहे, कागज़ कलम हँसते रहे.
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- क्रिश्ना

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